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Universal Basic Income
Finanacial वर्ष २०१७ के एक इकोनॉमिक सर्वे में यूनिवर्सल बेसिक इनकम की राय दी गयी थी और यह इस लिए दी गयी थी हमारे भारत देश में गरीबी को नाबूद किया जा सके| देश भर के लोगो को मोदी सरकार नोटबंदी के बाद जल्द ही बड़ा गिफ्ट दे सकती है| केंद्र सरकार भारत में यूनिवर्सल बेसिक इनकम लागू करने के baare में सोच रही है|जिसके माध्यम सभी जनता को हर महीने एक निश्चित सैलरी के रूप में दी जायेगी| हमारे भारत देश में आर्थिक सर्वे के मुताबिक हमारी भारत सरकार नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा देश की हर एक जनता को हर महीने एक निश्चित आवक करने के लिए यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम लागू की गयी है| इस योजना से गरीबी नाबूद करने में मदद मिलेगी| यूनिवर्सल बेसिक आय योजना से जुडी हुयी महत्वपूर्ण बाते| इस Universal Basic Income Scheme के माध्यम से हमारी भारत सरकार देश की जनता को बिना शर्त एक निश्चित रकम देती है| इस योजना में कुछ तबकों जैसे की गरीबी रेखा के निचे रहने वालो को अगर यह सुविधा दी जाती है तो इसको पार्शल बेसिक इनकम कहते है| इस स्कीम यानि की यूनिवर्सल बेसिक इनकम का सुझाव लंदन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गाय स्टैंडिंग ने दिया था | यह योजना को मध्यप्रदेश की एक पंचायत में एक पायलट प्रोजेक्ट के तोर पर ऐसी योजना को लागू किया गया था| जिसकी वजह से बहुत सारे positive review आए| इंदौर के ८ गांवों की ६००० की आबादी के बीच २०१० से २०१६ के बीच इस स्कीम का प्रयोग किया| इसमें महिलाओ और पुरुषो को ५०० रूपये और बच्चो को १५० रूपये दिए गए है| यह ५ साल में इसमें ज्यादा से ज्यादातर फायदा मिलने के बाद अपनी आय बढ़ा ली है| प्रोफ़ेसर गाय स्टैंडिंग के के कहने मुजब भारत में यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम को चालू करने पर जीडीपी का ३ से ४ परसेंट खर्च आएगा| हालांकि अभी कुल जीडीपी का ४ से ५ फीसदी परसेंट सरकार सब्सिडी में खर्च किया है| हमारी सरकार सब्सिडी को सरकारी खजाने पर बोझ न पड़� Published on Wednesday, August 22, 2018
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Tuesday, May 21, 2019
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vision
YG MART स्वंय का कोई भी प्रोडक्ट नही है। सभी प्रकार के दुकानदारों, व्यापारिओं, मॉल, ऑनलाइन शॉपकीपर, जैस :-स्नेपडील, फ्लिपकार्ट, एमोजोंन,इत्यादि। इसीप्रकार शिक्षा के विभाग में सभी विद्यार्थियों को भविष्य में आर्थिक मदत देने की कोशिश रहेंगी। ऐसे असंख्य विभागों से कमीशन विस्तारित कर सभी लोगों को आर्थिक सहायता प्रदान करने की कोशिश रहेंगी। जैसे :- सभी केबल/इंटरनेट वितरण के सभी सदस्यों को वॉयजी मार्ट द्वारा कमिशन विस्तारित का पध्दति (system) समझाकर यदि सदस्यों को सही लगें तो मात्र ₹ 700/- से उनकी पूर्ण प्रमाण पत्रों के साथ पंजीकृत करते हैं। (2): YG MART की सभी ₹ लेन-देन कैशलेस से ही होंगे। (3) YG MART पंजीकृत सभी विक्रेताओं के पास ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी। (4): YG MART द्वारा ₹ लेन-देन पर सरकारी नियमों का उल्लघंन नहीं करते हुए सभी प्रकार के कर (टैक्स) भुगतान के बाद शुद्ध ₹ स्मार्ट कार्ड में दिये जायेंगे। (5): अप्रत्यक्ष YG MART ग्राहकों का बहुत बड़ा प्लेटफार्म तैयार कर व्यापार की गति तेज़ करते हैं। (6)YG MART उन पंजीकृत स्मार्ट कार्ड जिसने अधिक लेन-देन से बाज़ार की गतिविधियों पर विशेष ध्यान रख कर उसे रिवॉर्ड देने की कोशिश रहेगें। (7): YG MART :- विश्व मे सभी वर्गों को आमंत्रित करते हुए अपने -अपने विचार,योजना, संद्धि या सुझाव का सम्मानित कर विचार विमर्श से सेवा का मौका दिया जाता हैं। (8) इससे बाज़ारो में ग्राहकों की संख्या , अधिक के साथ रोजगार निर्माण होगी औऱ बाज़ारो की गतिविधियों बढ़ेगी। (9) Our team :- 1) services 2) merchants 3) online 4) education 5) financial 6) health & wealth 7) politician. (10) Service :- cable TV operator , internet service provider , electronic part repair , mason , wireman, carpenters , advocate , doctors etc. Merchants :- all malls , shopkeeper etc. Online :- benhor fashion , D enterprises , snapdeal etc. Education :- academy , schools , collage , degree of professionals , computer classes , all kinds of traning etc. Financial :- co.op.cr.soc. , investment & finance company , banks etc. Health & wealth :- yoga trainer , zhimkhana , ayurvedic medicine etc. Politician :- bharatiya janta party (BJP), congress , shivsena , rastriya congress party (NCP) etc.
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Thursday, May 30, 2019
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Universal Basic Income
यूबीआई क्यों? यूबीआई का विचार नया नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, यह आय के पुनर्वितरण के साधन के रूप में बहुत बड़े पैमाने पर विश्व स्तर पर पुनर्जीवित हुआ है। वर्तमान में दुनिया भर में कई प्रयोग / पायलट चलाए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी भी देश द्वारा ऐसा नहीं अपनाया गया है। यूबीआई के प्रति झुकाव के मुख्य कारण दो हैं: बढ़ती और विशाल असमानता ऑटोमेशन का खतरा नौकरियों को प्रभावित करता है और बेरोजगारी पैदा करता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है कि मौजूदा प्रणाली "बेकार और विशाल असमानता और बेरोजगारी की ज्वार की लहरों के साथ सामना नहीं करेगी।" (एनी लॉरी, "पीपल पीपल मनी: हाउ ए यूनिवर्सल बेसिक इनकम एंड पॉवर्टी, रिवॉल्यूशन वर्क, एंड रीमेक द वर्ल्ड" के लेखक) 2016-17 के यूबीआई के आर्थिक सर्वेक्षण (ईएस) का मूल आधार: "एक न्यायपूर्ण समाज की गारंटी की जरूरत है प्रत्येक व्यक्ति को एक न्यूनतम आय, जिस पर वे भरोसा कर सकते हैं, और जो बुनियादी सामानों की पहुंच और गरिमा के साथ जीवन के लिए आवश्यक सामग्री नींव प्रदान करता है। " इस यूबीआई मॉडल के तीन घटक हैं: सार्वभौमिकता, अन-सशर्तता और एजेंसी (सम्मान के लिए नकद हस्तांतरण के रूप में सहायता प्रदान करके, न कि हुक्म चलाना, प्राप्तकर्ताओं की पसंद)। इसकी प्रमुख विशेषताएं: 2016-17 के लिए गरीबी रेखा 7,620 रुपये प्रति वर्ष निर्धारित की गई है, तेंदुलकर की गरीबी रेखा के फार्मूले का उपयोग करते हुए (मुद्रास्फीति अनुक्रमण 2011-12 के लिए 2016-17 के लिए प्रति वर्ष 5,400 रुपये 0.45% के लक्ष्य गरीबी स्तर के साथ निर्धारित) तेंदुलकर गरीबी रेखा से ऊपर सभी गरीबों को उठाने के लिए। यह UBI के उद्देश्य के लिए 75% आबादी को सार्वभौमिक बनाता है। लागत और राजकोषीय स्थान: ES मॉडल का सकल घरेलू उत्पाद का 4.9% खर्च होगा - जैसा कि सभी 950 केंद्रीय क्षेत्र और केंद्रीय प्रायोजित उप-योजनाओं (2016-17 के वास्तविक आवंटन) पर जीडीपी का 5.2% खर्च किया गया है। इसलिए, राजकोषीय स्थान मौजूद है - लेकिन केवल अगर यूबीआई सभी मौजूदा केंद्र सरकार की जगह लेता है। योजनाओं। डीबीटी के माध्यम से और आधार का उपयोग करके सभी केंद्रीय योजनाओं की जगह, आय हस्तांतरण। क्रमिकता का प्रयोग करें - जैसे महिलाओं, बुजुर्गों, विधवाओं, विकलांगों आदि से शुरू करना।
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Tuesday, May 21, 2019
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Universal Basic Income
Why UBI? The idea of UBI is not new but in the past few years, it has resurfaced globally in a very big way as a means of redistributing income. Several experiments/pilots are being currently run across the world, but not yet adopted by any country as such. The primary reasons for the tilt towards UBI are two: Growing and vast inequality Threat of automation affecting jobs and creating joblessness Some experts think the existing system "would falter and fail if confronted with vast inequality and tidal waves of joblessness." (Annie Lawrey, author of "Give People Money: How a Universal Basic Income Would End Poverty, Revolutionize Work, and Remake the World") Basic premise of Economic Survey (ES) of 2016-17's UBI: "A just society needs to guarantee to each individual a minimum income which they can count on, and which provides the necessary material foundation for a life with access to basic goods and a life of dignity." Three components of this UBI model are: universality, un-conditionality and agency (by providing support in the form of cash transfers to respect, not dictate, recipients' choices). Its key features: Poverty line for 2016-17 has been fixed at Rs 7,620 per year, using Tendulkar's poverty line formula (inflation indexing @ Rs 5,400 per year fixed for 2011-12 to 2016-17 with a target poverty level of 0.45%) to lift all poor above the Tendulkar poverty line. It takes 75% of population as universal for UBI purpose. Cost and fiscal space: ES model will cost 4.9% of GDP - as against 5.2% of GDP spent on all 950 central sector and centrally sponsored sub-schemes (actual allocation of 2016-17). So, fiscal space exists - but only if UBI replaces all existing Central govt. schemes. Income transfer through DBT and by replacing all Central schemes, using Aadhaar. Use gradualism - like starting with women, elderly, widows, disabled etc.
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Tuesday, May 21, 2019
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Universal Basic Income
What is UBI? UBI is a fixed income every adult - rich or poor, working or idle - receives from government. The idea is that a society, as a first priority, should look out for its people's survival; the lesson is that possibly it can do so without unequal redistributive plans. According to Basic Income Earth Network (BIEN), a global network of academics, students and social policy practitioners promoting and serving as a repository of published research on UBI, "A basic income is a periodic cash payment unconditionally delivered to all on an individual basis, without means-test or work requirement."
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Tuesday, May 21, 2019
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Universal Basic Income
The central government is believed to be working on a universal basic income (UBI) scheme for the poor ahead of the General Elections. The Economic Survey of 2016-17 had first flagged the UBI as "a conceptually appealing idea" and a possible alternative to social welfare programmes targeted at reducing poverty.
Published on :
Tuesday, May 21, 2019

 

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